शर्मिन्दगी महसूस हो रही है... क्या हमें वास्तव में अच्युतानंदन जैसे
नेताओं की ज़रूरत है... क्या हमने वास्तव में अच्युतानंदन जैसे नेता पाने
के लिए लोकतंत्र की व्यवस्था के बीच वोट दिया था... क्या अच्युतानंदन जैसे
लोगों के नेता बन जाने में हम कहीं भी दोषी नहीं हैं... क्यों अच्युतानंदन
जैसे नेताओं को बर्दाश्त करते रहना हमारी मजबूरी है...
एक आतंकवादी हमले के दौरान मुल्क की आन, बान और शान के साथ-साथ जनसाधारण
की जान का बचाव करते हुए एक जांबाज़ जान से गया... आप उसके घर पर
'तथाकथित' रूप से श्रद्धांजलि अर्पित करने जाते हैं... वहां दुःख और
गुस्से में भरे उसके पिता ने आपसे कुछ कहा, और शायद घर में प्रवेश नहीं
करने दिया... आप बिफ़र जाते हैं, और बयान देते हैं - अगर वह शहीद मेजर का
घर नहीं होता, तो वहां कोई कुत्ता भी नहीं जाता...
याद रखिएगा अच्युतानंदन जी, जिस घर को आप कुत्तों के जाने योग्य भी नहीं
समझते, उसी घर के बेटे ने अपनी जान देकर देश की रक्षा की... शर्म आ जाती
है, कि हमने न सिर्फ़ ऐसे व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि चुना है, बल्कि ऐसे
और भी लोगों को प्रतिनिधि के रूप में विधानसभा भेजा, जिन्होंने
अच्युतानंदन जैसे शिष्टाचार से कोरे, शहादत का सम्मान करने में अक्षम
व्यक्ति को सदन का नेता चुनकर हमारे सिर पर मुख्यमंत्री बनाकर बिठा
दिया... यकीन मानिए, अच्युतानंदन से ज़्यादा यह हमारे लिए शर्मिंदा होने
की बात है...
मैं अच्युतानंदन जी से सिर्फ़ एक सवाल करना चाहता हूं... आदरणीय
मुख्यमंत्री जी, एक बार ठंडे दिमाग से सोचकर बताइएगा, मेजर के पिता ने
आपके साथ ही ऐसा व्यवहार क्यों किया... अगर आप मुख्यमंत्री न होकर कोई
साधारण व्यक्ति होते, तो शेष लोगों की ही तरह आपको भी उनके घर में प्रवेश
मिला होता, और यह सब अवांछनीय घटित नहीं होता...
इस सवाल का जवाब है... जनता के प्रति आपकी निर्लिप्तता, जिसके कारण आप कभी
आम लोगों को 'अपने' लगे ही नहीं... जनता के दिल में आपके प्रति गुस्सा,
जिसकी जड़ में है कमज़ोर राजनैतिक व्यवस्था, जो संदीप जैसे जांबाज़ों की
शहादत की वजह बनी... लेकिन आपके मुताबिक अगर ऐसा नहीं है तो हमारे कुछ
सवालों के जवाब दीजिए...
- क्यों आप सारे काम छोड़कर पहले ही दिन मेजर संदीप के घर पर नहीं पहुंचे...?
- क्यों आप मेजर के पिता के दिल में मौजूद गुस्से को बर्दाश्त नहीं कर सके...?
- आपकी प्रतिक्रिया, जिसे दोहराते हुए भी शर्म आती है, को देखते हुए क्या
आप अब भी कह सकेंगे कि आप श्रद्धांजलि अर्पित करने संदीप के घर गए थे,
सिर्फ टीवी पर अपना चेहरा दिखाने नहीं...
खैर, अच्युतानंदन जी... इस वक्त आपके अलावा भी बहुत-से ऐसे नेता हैं, जो
सिर्फ़ राजनीति चमकाने के लिए इस दारुण मौके का इस्तेमाल कर रहे हैं, और
अफ़सोसनाक़ यह है कि कोई भी राजनैतिक दल ऐसे नेताओं के बिना अस्तित्व में
नहीं है... अब उन्हें अपना प्रतिनिधि बना बैठने के लिए हमें ख़ुद को ही
दोषी मानकर आगे के लिए रणनीति तैयार करनी होगी... सोचना होगा, कि क्या हम
ऐसे ही नेताओं के भरोसे ख़ुद को छोड़कर चिंता-मुक्त हो पाएंगे...
और हां, एक आखिरी नसीहत अच्युतानंदन जी के लिए... आपका कहना है कि अगर वह
शहीद का घर नहीं होता तो वहां कोई कुत्ता भी नहीं जाता, लेकिन क्या आपने
कभी सोचा है कि अगर आप मुख्यमंत्री नहीं होते, तो संदीप के घर पर आपके साथ
ऐसा व्यवहार होता, जो लिखा भी न जा सके...
Thursday, FEb 05 2009
Thiruvananthapuram. A pack of angry dogs are marching towards the house
of Kerala Chief Minister V S Achuthanandan. These dogs are coming from
the sea side and had left the Karnataka shores yesterday night, sources
in intelligence agencies have informed Mahamasti News. Security has
been beefed up at the residence of Mr. Achuthanandan as the dogs are
reportedly in a very hostile mood.
These dogs, belonging to Canine Protection Party (CPM), are reportedly
angry at the statement by the Kerala CM where he had claimed that not
even a dog would have visited the house of Major Sandeep Unnikrishnan’s
dad, had Sandeep not been martyred. The dogs have been furious since
then and running.
“He should talk about his clan only. What knowledge does he have about
us dogs? We won’t allow just any tom dick and harry to represent us and
speak on our behalf. We would let this guy know what it means to be a
true dog – loyal, loving, and respectful.” CPM chief Kuttanandan told
Mahamasti News.
Kuttanandan says his party has no plans to bite the Chief Minister and
accused the Chief Minister’s office of indulging in publicity stunt by
beefing up the security. Kuttanandan hoped that dogs from Kerala would
join in the peaceful protests.
“I am completely confident. I have seen humans standing together and
protesting against bad mouthed people. We dogs can surely do better.”
Kuttanandan expressed confidence.
In fact Kuttanandan told Mahamasti News that dogs’ protests would have
more impact than those of humans as dogs have been running all though.
“When you are running, you gain energy, when you are just standing up,
you gain inertia. I would request humans not to just stand up and shout
slogans, but to run towards a goal.” Kuttanandan advised to human.
Mahamasti News hopes that humans too can arrive at a goal and run towards it.
Achuthanandan ki Lungi ke ander ek pagal kutiya ko chhod dena chaiye
.
रात के १२ बजे जब अपने घर वापस आ रहा था, तो रास्ते में कुत्तों का वृहद्
सम्मेलन देखकर ठिठक गया। विश्वास दिलाता हूं कि मैं कुत्तों की भाषा समझ
सकता हूं। लेकिन दुख है कि कुत्तों की तरह बोल नहीं सकता। बहस बिलकुल
सामयिक और रोचक चल रही थी।
मुद्दा नेताओं द्वारा उनके अपमान का था।
यहां नेताओं के लिपिस्टिक प्रसंग से लेकर एनएसजी के शहीद कमांडो के
परिवारवालों के प्रति दी गयी टिप्पणियों पर जोरदार बहस चली। अंत में
सवॆसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित हुआ।
प्रस्ताव - कुत्तों की वफादारी को नजरअंदाज करना कुत्तों का अपमान है। आज
दुनिया के हर राष्ट्राध्यक्ष के समारोह स्थल पर पहुंचने से पहले ही कुत्ता
पहुंचता है और सुरक्षा सुनिश्चित करता है। कुत्ता जिसका नमक खाता है, उसके
प्रति आजीवन वफादार रहता है। वह ऐसे नेताओं से काफी ऊंचा है, जो सिफॆ
स्वाथॆ और पुश्त दर पुश्त के लिए धन इकट्ठा करने के पीछे लगे रहते हैं। हम
जैसे हैं, वैसे ही ठीक हैं। हम ऐसे नेताओं की घोर निंदा करते हैं, जो हमें
हीन भावना से देखते हैं और हमारी तौहीन करते हैं।
भारी मन से कुत्तों के समूह द्वारा पारित प्रस्ताव सुनकर घर आया।
उद्वेलित हूं।
क्या आप कुछ कहेंगे?





