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राहुल गाँधी इस देश का नेतृत्व नहीं कर सकते ?

 
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neeta

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Apr 22, 2010 06:13    [L[Quote]]
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राहुल गाँधी के अभी तक के क्रिया कलापों के आकलन के आधार पर मैं और मेरा अंतरात्मा यह कह सकता है कि राहुल गाँधी इस देश का नेतृत्व नहीं कर सकते हैं और ना ही इस महान देश के युवाओं का मार्गदर्शन कर सकते हैं /कुछ लोग मेरे इस राय से सहमत नहीं भी हो सकते हैं ,लेकिन मैं ऐसे लोगों को सहमत होने के लिए भी नहीं कहूँगा लेकिन मैं कुछ तथ्य राहुल गाँधी के बारे में सब के सामने जरूर रखूँगा /तथ्य रखने से पहले मैं यह बता दू कि मैं कभी भी किसी पार्टी का ना तो विरोध किया है और ना ही किसी पार्टी का समर्थन ,मैंने हमेशा देशहित और सामाजिक संतुलन का समर्थन किया है

और इसी सिलसिले के तहत बड़ी मुश्किल से मिले मुलाकात का समय लेकर राहुल गाँधी से १०/०२/२००९ को दस जनपथ पे व्यक्तिगत रूप से मिला था और मेरे मिलने का मकसद और मसौदा था सिर्फ और सिर्फ इंसानियत और ईमानदारी जो पैसे के वजह से खत्म होने के कगार पड़ है को बचाने के लिए राहुल गाँधी को आगे आने का आग्रह करना /लेकिन मिलने के बाद ही मैं समझ गया था कि मैं गलत जगह आ गया हूँ क्योंकि मैं चेहरे के हावभाव को प्राकृतिक रूप से पढने में भगवान कि कृपा से सक्षम हूँ /खैर मैं देश में अच्छे,सच्चे,इमानदार और देशभक्त लोगों कि सुरक्षा तथा देश में एक जनशिकायत मंत्रालय कि स्थापना हो और जिसमे देश के किसी भी कोने से आये शिकायत पर देश के सारे जाँच एजेंसी जो इस मंत्रालय के अधीन होती के संयुक्त जाँच के आधार पड़ एक साल में न्यायसंगत निपटारा होना अनिवार्य किया जाय जैसे मुद्दों पर बनाये गए फोल्डर को राहुल गाँधी के इस वादे पे दे कर आया था कि वो इसे खुद पढ़कर इसका जवाब जरूर देंगे,लेकिन मैं एक साल बाद भी देशहित के गंभीर मुद्दे जिससे मेरा कोई भी व्यक्तिगत हित नहीं जुड़ा था के जवाब का इंतजार कर रहा हूँ /खैर आज पार्टी का हित और अपना सत्ता सुख के हित के आगे देश और समाज का हित को चाहने वाला मुझ जैसा कोई बेवकूफ ही हो सकता है ,राहुल गाँधी जैसा होनहार और काबिल व्यक्ति से हमें ऐसी आशा नहीं करनी चाहिए / आजतक राहुल गाँधी जो एक सांसद भी हैं ने कभी भी देश में बढ़ रहे महंगाई,भ्रष्टाचार और असत्य कि हर तरफ जीत के खिलाफ अपने पार्टी या यु पी ए के सहयोगी पार्टी पड़ दवाब बनाने और आम लोगों कि परेशानियों को हल करने का ठोस कदम उठाने के लिए अपने पार्टी को मजबूर करने का काम नहीं किया है / दिल्ली में बसों कि खरीद का मामला हो या कोमनवेल्थ गेम के नाम पर भ्रष्टाचार का बेशर्मी भरा खेल ,जिसकी जाँच अगर इमानदार समाजसेवकों द्वारा करायी जाय तो बड़े-बड़े भ्रष्टाचार के खिलाडी तिहार जेल में बंद नजर आयेंगे ये कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिसपर राहुल गाँधी का चुप रहना इस बात को साबित करने के लिए काफी है कि राहुल गाँधी कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व कर सकते हैं,सत्ता का सुख सच ना बोल कर,चुप रह कर भोग सकते हैं लेकिन इस देश का नेतृत्व और इस देश के युवाओं का नेतृत्व नहीं कर सकते हैं / क्योंकि इस देश का इतिहाश गवाह है कि स्वार्थी लोगों ने जब भी इस देश का नेतृत्व किया है देश नरक कि ओर आगे बढ़ा है / इस देश को आज महात्मा गाँधी,शहीद भगत सिंह,चन्द्रशेखर आजाद,खुदीराम बोश और सुभाषचन्द्र बोश जैसे त्यागी व निड़र लोगों कि आवश्यकता है / राहुल गाँधी को अगर सही मायने में देश का नेतृत्व करना है तो स्वार्थ और पार्टी के हितों से ऊपर उठकर निडरता से देश और समाज हित को जोरदार तरीके से उठाना चाहिए,अगर राहुल गाँधी ऐसा नहीं कर सकते तो,मैं निडरता से उनको बता देना चाहता हूँ कि जिस पार्टी को बचाने के लिए वे देश और समाज हित को त्याग रहें हैं वह पार्टी ही पाँच साल बाद नहीं बचेगी / क्योंकि आमलोगों कि हाय तो कैसे कैसे साम्राज्य को बर्बाद कर के रख दिया है,तो ये कांग्रेस पार्टी क्या चीज है ?

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