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भारत मां क्यो है, पिता क्यों नहीं ?

 
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neeta

[L[posts:]] 70

Apr 17, 2009 03:23    [L[Quote]]
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भारत मां क्यो है, पिता क्यों नहीं ?

उन दिनो दिमाग को किताबों में घूसेड़ कर उसे बुरी तरह से थका देने के बाद थोड़ा चैन लेने शराब में डूब जाता था..फटे तक पीता था, कोनवालोय के अंदाज में। दारू कब और कैसे मुंह से लगी थी मुझे खुद याद नहीं...शायद सरस्वती पुजा के दिन। मुहल्ले भर के आवारा लौंडे सरस्वती पुजा बड़ी धुमधाम से करते थे, एक महीना पहले से ही घूम-घूम कर चंदा काटा जाता था और उसी चंदे के पैसे से पूजा के साथ-साथ दारू चलता था। हां मां सरस्वती के प्रति गहरी आस्था में कोई कमी नहीं होती थी, लेकिन यह भी सच है कि दारू उन्हीं दिनों मुंह लगा था.
बाद के दिनों में शराब के नशे में डाक बंगला चौराहे की एक दुकान पर हिटलर का मीन कैंफ हाथ लगा और एक बार जब उसको पढ़ना शुरु किया तो शराब का नशा भी उसके सामने फीका लगने लगा...बस पढ़ता ही गया...पूरी किताब खत्म करने के बाद ही अगल-बगल की दुनिया दिखाई दी...और इसका हैंगओवर लंबे समय तक बना रहा...शायद यहां जो कुछ भी मैं लिख रहा हूं, वह मीन कैंफ के हैंगओवर का ही असर है। हिटलर की आत्मकथा को दुनिया का मैं सर्वश्रेष्ट आत्मकथा मानता हूं...उस आत्मकथा में एक स्पष्ट उद्देश्य दिखाई देता है, और इसी में किसी भी आत्मकथा की सार्थकता है। हिटलर की आत्मकथा एक आंदोलन की रूपरेखा को व्यवहारिक स्तर पर बहुत ही मजबूती से रखता है, उस आंदोलन के उद्देश्य को लेकर चाहे जो बहस हो, लेकिन उसका मैकेनिज्म जमीन पकड़े हुये है।
हिटलर की आत्मकथा को पढ़ने के बाद कई तरह के सवाल दिमाग में कौंधते रहे, जैसे भारत को मां क्यो कहा जाता है, पिता क्यों नहीं ? हिटलर पितृ भूमि की बात करता है, और हमलोग मातृभूमि की। बचपन में पढ़ाया गया था कि भरत के नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा...मेरी समझ में यह नहीं आता था कि फिर भारत माता कैसे हो गई। मैं भारत को पितृ भूमि के रूप में देखने लगा था...मीन कैंफ को पढ़ने के बाद अपने देश और जमीन की प्रति मेरा परसेप्शन चेंज हो गया था...
कभी-कभी खोपड़ी में कोई उलटी बात बैठ जाती है, जिसका कोई मायने मतलब नहीं होता, लेकिन वह लंबे समय तक आपके हावभाव और सोचने की दिशा को घुमाता रहता है...खोपड़ी यदि चारो दिशा में नहीं घूमे तो वह खोपड़ी ही क्या ? वाइमर गणतंत्र पर हिटलर की प्रतिक्रिया पढ़कर भारत का गणतंत्रीय ढांचा मेरी आंखों के सामने घूमने लगा.. वाइमर गणतंत्र दुनिया का सबसे मजबूत गणतंत्र, जिसका हिटलर ने कबाड़ा निकाल दिया...यानि हिटलर उस गणतंत्र से भी मजबूत था।
खैर मामला चाहे जो मीन कैंफ के पढ़ने के बाद हिटलर मेरे दिमाग में घुस गया था...और हिटलर को लेकर जीवन में बड़े-बड़े पंगे होते रहे...जर्मनी में मीन कैंफ पर आज भी प्रतिबंध है, जबकि हिटलर के समय इस किताब को बाइबिल की तरह बांटा जाता था..हर घर में मीन कैंफ रखना जरूरी था...बहरहाल समय के साथ हिटलर तो दिमाग से उतर गया, लेकिन वो पल जो मैंने हिटलर के साथ बीताये हैं मेरी जीवन के अदुभुत पल हैं....वोदका के नशे में चुर होकर आज भी उन पलों को जीने के लिये जी ललचाता है...जो बीत गई वो बात गई माना वह बेहद प्यारा था....भारत पितृभूमि को संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता कब मिलेगा...?मिलेगा भी या नहीं...? भूख और गरीबी तो यहां की नीयती बन चुकी है...है कोई पोलिटिकल पार्टी जो यह दावा करे कि उसके सत्ता में आते ही भारत सुरक्षा परिषद के स्थायी सीट पर नजर आएगा....? यदि नहीं तो...किसे वोट दूं....??और क्यों दू...???वैसे एक मेरे वोट न डालने से कुछ भी उखड़ने वाला नहीं है....दुनिया अपनी गति से आगे बढ़ती रहेगी....और साथ में डेमोक्रेसी भी...डेमोक्रेसी एक धंधा है...और राष्ट्रवाद एक जलती हुई चीज है...
गड़गच्च के दारू पीने का मन कर रहा है...कोई है जो मेरे साथ बैठे...मैं चाहता हूं कि इन चीजों को अपने दिमाग से झटक कर के फेंक दूं...वोदका थोड़ी देर के लिए राहत देती है...लेकिन कुछ और चाहिये...जो मेरे दिमाग को पूरी तरह से अपने वश में कर ले...और मैं बुरी तरह से उसमें डुबता चला जाऊ...कोई गहरी अर्थ वाली चीज हो....वह कुछ भी हो सकता है...कुछ भी...हिटलर की गर्लफ्रेंड का नाम एमा ब्राउन था...हिटलर अपनी एमा थोड़ी देर के लिये मुझे देदे....तेरे साथ मरी थी...मरने के बाद क्या होता है...??बेहतर मौत कौन सी है...???एमा मेरे साथ वोदका का दो घूंट लगा और बता...हिटलर के साथ मर करके तुम्हे क्या मिला....??तुम अजीब महिला थी...??हिटलर के जीवन में तुम मीन कैंफ के बाद आई थी...हिटलर तू अपने समय का हिटलर होगा...अब तो तुझे कुत्ते भी गालियां देते हैं...अब तू थोड़ा साइड बैठ और मुझे एमा से बात करने दे...तो एमा तू क्या कह रही थी...वोदका इज योर प्वाइजन टू...ड्रींक...डार्लिंग, ड्रींक एंड लेट मी ड्रींक योर ब्राउनी आइज...वोदका से ज्यादा नशा है तेरी इन ब्राउनी आंखों में....आई थिंक यू वोंट माइंड इट...ओह माई गाड अकेले बैठे-बैठे छह पैग गटक चुका हूं...
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