दिल्ली हवाईअड्डे में टेलीफ़ोन बूथ में भ्रष्टाचार
पता नहीं इसे भ्रष्टाचार कहना कितना उचित है। कोई बड़ी बात भी नहीं है, लेकिन फिर भी चुभी जब मैं पिछली बार दिल्ली से जर्मनी आ रहा था। दिल्ली हवाईअड्डे में सभी गेट के पास कई Airtel के टेलीफ़ोन बूथ लगे हैं जिनके साथ कोई ऊँघ रहा लड़का बैठा होता है। बात करने के बाद वह लड़का पर्ची फ़ाड़कर बाहर निकालता है। पर्ची की प्रिंटिंग बहुत धुँधली होती है और वह लड़का उससे ज़्यादा पैसे मांगता है। मेरा बिल 13 रुपए का था और उसने बीस रुपए माँगे। ये स्वभाविक है कि वहां सब यात्री खाए पीए घर के होते हैं, पर्ची की ओर देखना भी शान के खिलाफ़ समझते हैं। और ये बहुत अधिक पैसे भी नहीं हैं। लेकिन फिर भी सिस्टम में गड़बड़ तो है? वो भी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जहां विदेशी यात्री बहुत होते हैं? मैं लाइन में अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहा था तो मेरे पीछे खड़ी एक लड़की को उसने अपने मोबाईल से ऑस्ट्रिया लगभग दस पन्द्रह मिनट फ़ोन करवाया और पैसे अपनी जेब में डाले। वैसे कोई बुरी बात नहीं, लेकिन वह वहां का कर्मचारी है, कोई आम राह चलता आदमी नहीं जिसने कभी कभार किसी की मदद कर दी। वह पता नहीं रोज़ कितनी बार ऐसा करता होगा। उसकी तो चाँदी है।





